Friday, 31 August 2018

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में नये मीडिया (वेब पत्रकारिता) की विकास यात्रा

आदि-अनादि काल से वैदिक ऋचाओं की जन्मदात्री उर्वरा धरा रही देवभूमि उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का गौरवपूर्ण अतीत रहा है। कहते हैं कि यहीं ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में सर्वप्रथम ज्ञानोदय हुआ था। बाद के वर्षों में आर्थिक रूप से पिछड़ने के बावजूद उत्तराखंड बौद्धिक सम्पदा के मामले में हमेशा समृद्ध रहा। शायद यही कारण हो कि आधुनिक दौर के ‘जल्दी में लिखे जाने वाले साहित्य की विधा-पत्रकारिता’ का बीज भी देश में अंकुरित होने के साथ ही यहां के सुदूर गिरि-गह्वरों तक भी विरोध के स्वरों के रूप में पहुंच गया। कुमाउनी के आदि कवि गुमानी पंत (जन्म 1790-मृत्यु 1846, रचनाकाल 1810 ईसवी से) ने अंग्रेजों के यहां आने से पूर्व ही 1790 से 1815 तक सत्तासीन रहे महा दमनकारी गोरखों के खिलाफ कुमाउनी के साथ ही हिंदी की खड़ी बोली में कलम चलाकर एक तरह से पत्रकारिता का धर्म निभाना प्रारंभ कर दिया था।  
लेकिन यह भी सच्चाई है कि उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में पत्रकारिता अभी भी केवल दो-तीन जनपदों में सिमटी हुई है। वहीं वेब पत्रकारिता और नये मीडिया की शुरुआत भर ही हो रही है। यहां शहरवासी तो नये मीडिया के सोशल मीडिया प्रारूप को काफी उपयोग करने लगे हैं, लेकिन ग्रामीणों के लिए अभी भी यह अधिक से अधिक नाम सुनी हुई सी चीज है। अलबत्ता, कॉलेजों में पढ़ने वाले ग्रामीण युवा भी जरूर शहरी युवाओं के संपर्क में आकर नये मीडिया के सोशल मीडिया प्रारूप पर हाथ आजमाना शुरू कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुमाऊं से संबंधित निम्न गतिविधियां देखी जा रही हैं:

कुमाऊं के ब्लॉग: 

ब्लॉगिंग को नये मीडिया का मुख्य आधार कहा जाता है, और वेब पत्रकारिता की शुरुआत सोशल मीडिया से भी पहले ब्लॉगिंग से ही मानी जाती है। किसी पश्चिमी ब्लॉगर ने ब्लॉग के माध्यम से ही अगली क्रांति होने की बात कही है। भारत में 2002 में विनय व आलोक कुमार ने हिंदी में ब्लॉग लिखने की शुरुआत की, लेकिन इसमें अंग्रेजी के आलेख भी थे। आगे आलोक कुमार ने 21 अप्रैल 2003 को अपना हिन्दी ब्लॉग ‘नौ दो ग्यारह’ शुरू किया, जिससे हिंदी ब्लॉगिंग की शुरुआत होनी मानी जाती है।  शुरुआत में ब्लॉगिंग साफ तौर पर पत्रकारिता से सीधे जुड़े होने के बजाय ब्लॉगरों की मनोभावनाओं-अभिव्यक्तियों को उजागर करने का माध्यम थी। शुरुआत में देश के बड़े शहरों व विदेशों में रहे लोग ही ब्लॉगिंग से जुड़े, क्योंकि वहां उन्हें वहां के निवासी अपनी भाषाओं में ब्लॉगिंग करते नजर आते थे। जबकि भारत में ब्लॉगिंग में उस दौर में इंटरनेट के साथ ही हिंदी में लिखने के लिए हिन्दी फांट आदि की अनेक समस्याएं और उसके लेखन की विधियां तथा लोगों के बीच तकनीकी जानकारी का अभाव जैसी बड़ी बाधाएं थीं। बाहर से हिंदी ब्लॉगिंग कर रहे शुरुआती ब्लॉगरों में अक्टूबर 2004 से ही ब्लोगर पर सक्रिय कुमाऊं के अल्मोड़ा जनपद निवासी प्रशांत जोशी भी थे, जिन्होंने शुरुआती दौर में अंग्रेजी में ।सउवतंइवलश्े च्मदेपमअमए डंलं ज्ीवउंेए ॅमककपदह ैूममज डमउवपत आदि कुमाऊं में ट्रेकिंग व अन्य विषयों पर ब्लॉग लिखने की शुरूआत की थी। लेकिन इन ब्लॉगों के बारे मंे अधिक जानकारी नहीं मिलती है। 
आगे वर्ष 2007 इंडिक यूनीकोड के आगमन के साथ ही उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल और यहां के सरोकारों के जिलए भी ब्लॉगिंग की शुरुआत का वर्ष रहा। इस वर्ष के पहले दिन ही यानी 1 जनवरी 2007 से दिल्ली में रहने वाले एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में तब भी उच्च पदस्थ व वर्तमान में सीईओ का पद संभाल रहे अल्मोड़ा निवासी कमल कर्नाटक व बागेश्वर के माही सिंह मेहता आदि कुछ प्रवासी कुमाउनी ब्लॉगरों ने ‘मेरा पहाड़ फोरम’ शुरू किया, जो ब्लॉग से एक कदम आगे इंटरनेट पर सक्रिय हो रहे पर्वतीय लेखकों, ब्लॉगरों की अभिव्यक्तियों का सामूहिक फोरम था। आगे 25 फरवरी 2007 को हैदराबाद में रहने वाली अल्मोड़ा मूल की शशि पांडे श्रीवास्तव ने अपनी भावाभिव्यक्तियों के ब्लॉग ‘घुघूती बासूती’ की शुरुआत की, जिसे ज्ञात जानकारी के अनुसार कुमाऊं मंडल का पहला व्यक्तिगत हिंदी ब्लॉग माना जा सकता है। यह ब्लॉग अब भी उपलब्ध है, तथा अपडेट भी होता रहता है। इसी दौरान मार्च 2007 से ब्लॉगर पर सक्रिय मेरा पहाड़ फोरम शुरू करने वाले कमल कर्नाटक ने ही काकेश नाम से ‘काकेश की कतरने ं(ज्ञंामेीष्े ज्ञनकज्ञनक)’ नाम का ब्लॉग शुरु किया। इसे भी कुमाऊं के प्रारंभिक ब्लॉगों में शुमार किया जाता है, लेकिन वर्तमान में इंटरनेट पर उपलब्ध न होने के कारण इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं हैं। इन शुरुआती ब्लॉगरों के बारे में खास बात यह भी रही कि इन्होंने कभी ब्लॉगिंग और इसके इतर भी ब्लॉगिंग के संबंध में अपने वास्तविक नाम और अपनी फोटो के साथ अपने परिचय का खुलासा नहीं किया। इसके साथ ही यह भी सही है कि तब तक कुमाऊं के लोगों के द्वारा ब्लॉगिंग कुमाऊं के भीतर नहीं बाहर से की जा रही थी।
अलबत्ता इसी वर्ष 2007 में ही हल्द्वानी से अशोक पांडे ने 14 जुलाई को ‘कबाड़खाना’ नाम से सामूहिक ब्लॉग शुरू किया, जो देश भर के खास ब्लॉगरों व पाठकों के वर्ग का पसंदीदा सामूहिक ब्लॉग मंच रहा। इसमें कुमाऊं ही नहीं, देश भर के अनेक प्रतिष्ठित लेखक-ब्लॉगर कबाड़खाना के ‘कबाड़ी’ कहलाते हुए भी खुशी से लिखते-पढ़ते रहे हैं। आगे इसी वर्ष 13 अगस्त 2007 से राजेश जोशी नाम के ब्लॉगर ने ‘कुमाउनी कल्चर’ नाम के ब्लॉग के जरिये ब्लॉगिंग की शुरुआत की, तथा कचकच (7 जुलाई 2008 से शुरू) व पहाड़ी मंच नाम के ब्लॉग भी चलाये। सितंबर 2007 में नैनीताल के दिनेश पालीवाल भी कबाड़खाना से जुड़े। वहीं 3 अक्टूबर 2007 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के हिंदी विभाग में प्रोफेसर व हिंदी के प्रख्यात कवि डा. शिरीष कुमार मौर्य ने ‘अनुनाद’ नाम से कबाड़खाना की तरह के स्वरूप में ही एक तरह की ऑनलाइन साहित्यिक पत्रिका की शुरुआत की। इसी वर्ष कबाड़खाना से जुड़ी मूलतः गंगोलीहाट पिथौरागढ़ निवासी व इधर मुक्तेश्वर के ग्राम सतोली में रह रहीं दीपा पाठक ने 6 अक्टूबर 2007 से अपने ब्लॉग ‘हिसालू-काफल’ के जरिये हिंदी ब्लॉगिंग से जुड़ीं। 17 नवंबर 2007 को डा. सिद्धेश्वर सिंह ने अपना ब्लॉग ‘कर्मनाशा’ शुरू किया, और इसी दिन यानी 17 नवंबर 2007 से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से ‘जोशिम’ नाम से प्रसिद्ध ब्लॉगर मनीश जोशी ने हिंदी कविताओं के ब्लॉग ‘हरी मिर्च’ की शुरूवात की। यह ब्लॉग अब भी इंटरनेट पर देखने को मौजूद है। इसी दौरान नैनीताल के अनाम प्रवासियों के द्वारा 19 नवम्बर 2007 को ‘नैनीताली और उत्तराखंड के मित्र’ नाम का एक अन्य ब्लॉग भी शुरू हुआ। उधर, काकेश का मुख्य ब्लॉग ‘काकेश की कतरनें’ तो अब इंटरनेट पर नहीं दिखता है, पर उनका सिंघई राज कुमार जैन के साथ एक मई 2008 को शुरू किया गया एक अन्य ‘बेटों का ब्लोग’ केवल एकमात्र पोस्ट के साथ ब्लॉगर पर अब भी मौजूद है। आगे 18 जुलाई 2008 से नैनीताल में ‘नैनीताल समाचार’ नाम के साप्ताहिक समाचार पत्र से जुड़ी विनीता यशस्वी ने अपना ब्लॉग ‘यशस्वी’ शुरू किया। ब्लॉगिंग के इस शुरुआती दौर में आशुतोष उपाध्याय का नैनीताल से प्रकाशित ‘बुग्याल’ नाम का ब्लॉग भी चर्चित रहा। इस बीच हल्द्वानी से शेफाली पांडे के द्वारा 7 दिसंबर 2008 को शुरू किया गया ब्लॉग ‘कुमाउँनी चेली’ भी स्तरीय ब्लॉग रहा। 
इस बीच 3 अप्रैल 2008 से कुमाऊं के विक्रम परमार ने ‘स्मैल ऑफ अर्थ आफ्टर रेन’ ने अंग्रेजी ब्लॉगिंग की शुरुआत की। हैदराबाद से अनुपम पंत अंग्रेजी ब्लॉग ‘एवरी डे’ और हल्द्वानी निवासी योगेश जोशी ‘अ स्ट्रेंजर्स जर्नी’ सहित कुमाऊं के कुछ अन्य अंग्रेजी ब्लॉगर भी सक्रिय रहे। 
आगे 2009 का वर्ष कुमाऊं में हिंदी ब्लॉगिंग के लिए युगांतरकारी वर्ष रहा। इसी वर्ष खटीमा ऊधमसिंह नगर से 1996 से 2004 तक उच्चारण पत्रिका के संपादक रहे डा. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ का 21 जनवरी 2009 में ‘उच्चारण’ नाम के ब्लॉग से हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में अवतरण हुआ। हिंदी ब्लॉगिंग के लिए स्वयं के साथ ही अन्य ब्लॉगरों को भी प्रेरित करते हुए श्री शास्त्री ने एक के बाद एक, अनेक ब्लॉग शुरू किये। उन्होंने 19 फरवरी 2009 से ‘रूप मयंक अमर भारती’, 30 अप्रैल 2009 से ‘शब्दों का दंगल’, 4 नवंबर 2009 से ‘धरा के रंग’ व दिसंबर 2009 में ‘चर्चा मंच ब्लॉग एग्रीगेटर’ के साथ शुरुआती एक वर्ष में ही पांच ब्लॉग व एग्रीगेटर शुरू कर अपने इरादे जाहिर कर दिये। आगे भी उन्होंने 9 फरवरी 2010 से ‘नन्हे सुमन’ और 23 नवंबर 2012 से ‘कार्टूनिस्ट मयंक’, ब्लॉगमंच, मेरी पसन्द, सुख का सूरज, पल्लवी, अभिव्यंजना-चक्र, प्रांजल-प्राची, कागज की नाव, सृजन मंच ऑनलाइन, नन्हे सुमन, मेरा संघर्ष व आमोद-प्रमोद नाम से न अनेक केवल ब्लॉग शुरू किये, वरन आगे भी बढ़ाये। इस दौरान मई 2009 से ब्लॉगर पर सक्रिय गंगोलीहाट पिथौरागढ़ निवासी युवा पत्रकार रोहित ने 5 जून 2009 से ‘रंगों आकारों की भगदड़ का कैनवास’ ब्लॉग से ब्लॉगिंग की शुरुआत की, और आगे 9 मार्च 2010 से ‘एक और डायरी’ तथा 3 नवंबर 2013 से ‘साभार’ नाम से तीन ब्लॉग शुरू किये। इस बीच 23 जून 2009 से टीसी बिष्ट ने ‘माउंटेन बर्ड’ और ‘के कूं च्याला, निर्बूद्धि राजक काथे काथ’ टैगलाइन के साथ कुमाउनी कविताओं-लेखों का ब्लॉग शुरू किया।
इसी वर्ष 12 सितंबर 2009 से कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा स्थित एसएसजे परिसर के रसायन भौतिकी विज्ञान के प्रोफेसर डा. सुशील कुमार जोशी ने अपनी हिंदी कविताओं का ब्लॉग ‘उलूक टाइम्स’ शुरू किया। इसी वर्ष नवंबर 2009 से शोधकर्ता नवीन जोशी नाम से ब्लॉगर पर सक्रिय हुआ और 15 दिसंबर 2009 को कुमाउनी कविताओं का ब्लॉग ‘ऊँचे पहाड़ों से.... जीवन के स्वर’ नाम से अपनी तरह का पहला ब्लॉग प्रकाशित किया। आगे शोधकर्ता ने 5 जनवरी 2010 को समाचार युक्त विचारों का ब्लॉग ‘मन कही’, इसी वर्ष 9 जून 2010 को अपने छायाचित्रों का ब्लॉग ‘प्रकृति मां’ व 7 जनवरी 2011 से सही अर्थों में समाचारों से युक्त पत्रकारिता का ब्लॉग ‘उत्तराखंड समाचार’ शुरू किया। आगे जोशी ने इसी ब्लॉग को परिष्कृत करते हुए वर्डप्रेस पर 3 जून 2014 से नवीन जोशी समग्र के रूप में स्थापित किया, जो बाद में 13 मई 2017 से अपने स्वतंत्र डोमेन के साथ नवीन समाचार के रूप में चल रहा है। इसके अलावा जोशी ने जून 2013 से पत्रकारिता के छात्रों के लिए ‘पत्रकारिता के गुर’ नाम से एक अन्य ब्लॉग भी शुरू किया। इसी दौरान मंजरी व कुंजल नाम से ब्लॉगिंग करने वाली एक ब्लॉगर ने 15 मार्च 2007 से अंग्रेजी में ‘थॉट्स’ व रोमन हिंदी में ‘बेनाम’ नाम के ब्लॉग भी शुरू किये। 
इसी दौरान 3 मई 2010 से नैनीताल से एक नये ब्लॉगर हर्षवर्धन वर्मा ने ‘अन-कवि’ के जरिये ब्लॉगिंग शुरू की, और बाद में रुद्रपुर जाकर भी ब्लॉगिंग जारी रखी। आगे हिसालू काफल वाली दीपा पाठक ने 30 जुलाई 2010 से अपने बच्चों के नाम से एक बच्चों का ब्लॉग ‘वन्या और अरण्य’ शुरू किया। वहीं हल्द्वानी के विवेक जोशी ने एक-दो लाइनों के रोचक हिंदी, कुमाउनी व अंग्रेजी मिश्रित वाक्यों व हेडिंगांे, यथा-‘वैलेंटाइन डे हैगो पै आज’ के नऐ स्टाइल के साथ ‘ठेट पहाड़ी’ नाम से ब्लॉग शुरू किया, जो वर्तमान में अपने प्लेटफार्म पर मौजूद नजर नहीं आ रहा है। वहीं 15 सितंबर 2010 से शुरू हुआ मूलतः मासर द्वाराहाट अल्मोड़ा के रहने वाले व अब रुद्रपुर में बस गये मदन मोहन बिष्ट का कुमाउनी कविताओं का ब्लॉग ‘मेरा कुमाऊं’, 10 नवंबर 2010 से काफल पर लिखी एकमात्र भावपूर्ण पोस्ट के साथ शुरू हुआ ‘रंगीलो कुमाऊं’ नाम का ब्लॉग, हिंदुस्तान दैनिक समाचार पत्र के संपादक प्रमोद जोशी के 27 नवंबर 2010 ‘जिज्ञासा’ नाम से शुरू हुए हिंदी ब्लॉग तथा 25 जुलाई 2011 से हल्द्वानी से पुरुषोत्तम पांडे के ‘जाले’ तथा हिंदुस्तान सहित अनेक बड़े मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुके पिथौरागढ़ निवासी वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह के हल्द्वानी में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के जरिये शिक्षा जगत में दूसरी पारी शुरू करने के साथ ‘हल्द्वानी लाइव’ ब्लॉग के जरिये 1 जनवरी 2012 से नये सफर की शुरुआत के साथ हिंदी ब्लॉगिंग की यात्रा जारी रही। 
इधर सोशल मीडिया के चढ़ाव के साथ ब्लॉगिंग में गिरावट आने के बाद भी नये छिटपुट हिंदी ब्लॉगों के आने का सिलसिला जारी है। पिट्सबर्ग से अक्षत जोशी का ‘म्यर कुमाऊं’ अगस्त 2014 से तथा हल्द्वानी में होम्योपैथी के चिकित्सक डा. रवींद्र सिंह मान की कविताओं का ब्लॉग ‘सफर के बाद’ 19 मई 2015 से शुरू हुआ है।। इनके अलावा नैनीताल से अमित कुमार रेनवी, महेंद्र छिम्वाल, योगिता अमित जोशी, अजय बिष्ट, अनिमेश साह, उत्पल, मेघना तलवार, शोभित मल्होत्रा व गौरव, हल्द्वानी से मोहित अग्रवाल, योगेश जोशी, ललित परिहार, गोविंद डसीला, डा. राकेश रयाल, सुगंधा अग्रवाल, अभिषेक व नमिता, रामनगर से कौस्तुभ पांडे, अल्मोड़ा से समीर ग्वासीकोटी, अंशु पांडे, जेडी विहारिनी, सैयद अली हमीद, डीएस लटवाल, आदित्य व हामिद कोलरौन, पिथौरागढ़ से हिमांशु करगेती व शालिनी, ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर से लालिमा यादव, अर्नब प्रोक्सिमा व निशांत अरोड़ा, काशीपुर से आदित्य वर्मा, अभिषेक नागर, मानस कुमार साहू व मोहम्मद हुसैन और खटीमा से रोविन चौहान के नाम इंडी ब्लॉगर  पर ब्लॉगर के रूप में दर्ज हैं, और इनमें से अधिकांश अंग्रेजी में कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, व्यंजन बनाने सहित अन्य विषयों पर लिखते हैं। 
वहीं, कुमाऊंवासियों के इंटरनेट पर अपनी सामग्री डालने की बात का विस्तार करें तो पेशे से इंजीनियर, गायकी के शौकीन सहित अनेक बहुमुखी प्रतिभाओं के धनी शैलेश उप्रेती का जिक्र भी करना होगा, जिन्होंने न्यू यॉर्क अमेरिका से जुलाई 2008 में ‘बेड़ू पाको डॉट कॉम’ शुरू किया। इसके अलावा राजेश जोशी ने 2010 में ‘पहाड़ी फोरम’ से ‘मेरा पहाड़’ की तर्ज पर उत्तराखंडी के साथ हिमांचली व नेपाली लोक भाषाओं के लेखन युक्त फोरम शुरू किया, पर वर्तमान में इंटरनेट पर उपलब्ध न होने की वजह से इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। अलबत्ता इस फोरम के नाम से ब्लॉगर पर 16 मई 2010 को कुछ उत्तराखंडी ब्लॉगों की जानकारी व ‘पहाड़ी फोरम’ के विभिन्न टॉपिक्स की जानकारी देते हुए ‘पहाड़ी फोरम’ नाम से एक ब्लॉग शुरू किया गया था, जो कि अब भी इंटरनेट पर देखा जा सकता है। इसी कड़ी में शांतनु चौहान का ‘यंग उत्तराखंड फोरम’ सहित कुमाऊं क्षेत्र की सामग्री युक्त कई अन्य वेबसाइटें भी एक दौर में काफी चर्चित रहीं। 
इधर ब्लॉगिंग के मौजूदा दौर की बात करें तो इस पर कुमाऊं के शुरुआती ब्लॉगर अशोक पांडे का मानना है कि ब्लॉगिंग की अब हत्या हो चुकी है, और इसकी हत्या सोशल साइटों ने की है, जिनमें ब्लॉगिंग जैसे लंबे धैर्य व साहस के बिना चट-पट अभिव्यक्ति हो जाती है, और एक ब्लॉग पोस्ट लिखने के लिए जितने ज्ञान, अध्ययन व धैर्य इत्यादि की जरूरत पड़ती है, सोशल मीडिया पहले ही छोटी-छोटी अभिव्यक्तियों के जरिए उसका क्षरण कर चुका होता है। 

कुमाऊं के न्यूज पोर्टल: 

21वीं सदी के दूसरे दशक में इंटरनेट के सबकी पहुंच में आने, समाचार पत्रों द्वारा अपने ई-पेपरों के साथ न्यूज पोर्टल लाने तथा हिंदी की वेबसाइटों को भी गूगल द्वारा एडसेंस के जरिये विज्ञापन दिये जाने की पहल के साथ पत्रकारिता से जुड़े लोगों में अपना न्यूज पोर्टल लाने का चलन बढ़ा है। न्यूज पोर्टल साफ तौर पर इंटरनेट पर समाचार सामग्री उपलब्ध कराने वाली वेबसाइटें होती हैं। शोधकर्ता नवीन चंद्र जोशी के द्वारा 5 जनवरी 2010 को ब्लॉगर पर शुरू किया गया ब्लॉग मन कही (नवीन समाचार) और 7 जनवरी 2011 को ‘उत्तराखंड समाचार’ इस कसौटी पर खरे उतरते हैं। इस तरह यह कुमाऊं ही नहीं उत्तराखंड का पहला न्यूज पोर्टल कहा जा सकता है। आगे शोधकर्ता ने 3 जून 2014 से इसे वर्डप्रेस पर पहले ‘नवीन जोशी समग्र’ के रूप में ‘नवीन जोशी1 डॉट वर्डप्रेस डॉट कॉम’ पर तथा बाद में ‘नवीन समाचार डॉट वर्डप्रेस डॉट कॉम’ पर ‘नवीन समाचार’ के नाम से आगे बढ़ाया। वर्डप्रेस पर यह पोर्टल अब भी मौजूद है। जबकि वर्तमान में 13 मई 2017 से ‘नवीन समाचार’ अपने स्वतंत्र डोमेन ‘नवीन समाचार डॉट कॉम’ पर चल रहा है। हालांकि इस शुरुआती दौर में वर्ष 2012 से नैनीताल से प्रकाशित पाक्षिक समाचार पत्र ‘नैनीताल समाचार’ का इसी नाम से न्यूज पोर्टल शुरू हुआ, जो इधर बंद होने के बाद नवंबर 2017 से समाचार डॉट ओरआरजी डॉट इन के नये डोमेन पर चल रहा है। 
आगे हल्द्वानी के देवलचौड़ से यूटी मीडिया वेंचर द्वारा 9 सितंबर 2014 को अपना डोमेन लेकर ‘उत्तरांचल टुडे डॉट कॉम’ न्यूज पोर्टल शुरू किया गया। वहीं 2015 के बाद न्यूज पोर्टल शुरू करने की होड़ सी नजर आर्इ्र। हल्द्वानी से गौरव गुप्ता ने अपने साप्ताहिक समाचार पत्र ‘देवभूमि पोल खोल’ अखबार का इसी नाम से न्यूज पोर्टल तीन फरवरी 2015 से शुरू कर इसकी शुरुआत की। इसी दौरान रुद्रपुर से सांध्य दैनिक ‘वसंुधरा दीप’ का न्यूज पोर्टल व ई-पेपर प्रारंभ हुआ। आगे 21 मार्च 2015 से नैनीताल से शुरू हुए ‘एक दगड़िया’ साप्ताहिक समाचार पत्र ने इसी दिन इसी नाम से अपना न्यूज पोर्टल भी शुरु किया। वहीं हल्द्वानी से दिसंबर 15 में ‘न्यूजजंक्शन24’ शुरू हुआ, जो वर्तमान में उपलब्ध नजर नहीं आ रहा है। 26 जुलाई 2016 से कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में डिप्लोमा पाठ्यक्रम में शिक्षारत युवा पंकज पांडे ने ‘हल्द्वानी लाइव डॉट कॉम’ नाम से न्यूज पोर्टल शुरू किये। आगे हल्द्वानी से सहारा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार विपिन चंद्रा ने 16 नवंबर 2016 से ‘न्यूज टुडे नेटवर्क नाम से अपने न्यूज पोर्टल शुरू किया। इसी कड़ी में मनोज आर्य द्वारा अपने पिता प्रसिद्ध पत्रकार ओम प्रकाश आर्य के द्वारा उर्दू में शुरू किये गये अखबार ‘खबर संसार’ का न्यूज पोर्टल दिसंबर 2016 से, हल्द्वानी से प्रकाशित सांध्य दैनिक ‘उत्तरांचल दीप’ का न्यूज पोर्टल जनवरी 2017 से शुरू किये। वहीं चम्पावत से कपिल जोशी के द्वारा 15 दिसंबर 2016 से ‘कुमाऊँ पोस्ट’ नाम का समाचार पोर्टल भी संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा आज, उत्तर, उजाला, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला व दैनिक जागरण में कार्य कर चुके पत्रकार विनोद पनेरू ने 19 जून 2017 को हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र कुमाऊं जनसंदेश का संपादन शुरू करने के साथ ही इसी दिन हिंदी समाचार पोर्टल ‘कुमाऊं जन संदेश’ की शुरुवात की। नबंवर 2017 से रुद्रपुर के रवि कुमार वैश्य के नाम पर पंजीकृत एवं हल्द्वानी से शगुन गुप्ता द्वारा संचालित ‘हल्द्वानी लाइव डॉट इन’ नाम से भी एक अन्य समाचार पोर्टल चल रहा है, जिसमें जनता की आवाज, यूथ की आवाज, सीनियर सिटिजन की आवाज, महिलाओं की आवाज, शहर की शख्सियत, शहर के अधिकारी और नेता, सिटी-लाइव तथा शहर में कब कहां क्या आदि कैटेगिरी में खबरें पसंद की जा रही हैं। इधर 2018 में भी नये न्यूज पोर्टलों के निकलने का सिलसिला जारी है। अल्मोड़ा से उत्तरान्यूज डॉट कॉम 17 अप्रैल से व क्रिएटिवन्यूजएक्सप्रेस डॉट कॉम 28 अप्रैल से और हल्द्वानी-देहरादून से जनपक्षन्यूज डॉट कॉम 29 मई से प्रारंभ हुए हैं। 
यह भी दिलचस्प तथ्य है कि उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2017 में शासकीय विज्ञापनों के लिए जिन 26 न्यूज पोर्टलों को इम्पैनल किया है, उनमें से केवल चार कुमाऊं से, शेष 21 राज्य की राजधानी देहरादून से तथा एक ‘ग्राउंड0 डॉट इन’ उत्तरकाशी से चल रहे हैं। कुमाऊं से निकल रहे चार में से तीन न्यूज टुडे नेटवर्क, उत्तराखंड पोस्ट डॉट कॉम व उत्तरांचल टुडे डॉट कॉम हल्द्वानी से तथा हल्द्वानी केे इतर शेष कुमाऊं से केवल एक न्यूज पोर्टल यूकेन्यूज डॉट को डॉट इन अल्मोड़ा से प्रीति भट्ट द्वारा निकाले जा रहे हैं। ‘उत्तराखंड पोस्ट डॉट कॉम’ हल्द्वानी निवासी दीपक तिवारी द्वारा प्रकाशित बताया गया है।  
इनके अलावा जागरण डॉट कॉम, सहारा लाइव डॉट कॉम, अमर उजाला डॉट कॉम, लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम आदि समाचार पत्रों के समाचार पोर्टलों पर भी कुमाऊं के समाचार उपलब्ध होते हैं, तथा दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा आदि राष्ट्रीय हिंदी दैनिकों के ई-पेपर और न्यूज पोर्टल भी कुमाऊं मंडल से संबंधित समाचार देते हैं। इनके साथ ही दैनिक शाह टाइम्स, खबर संसार, हिमालय गौरव उत्तराखंड, गढ़वाल की माटी तथा सांध्य दैनिक क्राइम स्टोरी, उत्तरांचल दीप, उत्तरांचल दर्पण, उत्तराखंड शक्ति, नजरिया खबर, दिव्य हिमगिरि, ज्योति दर्पण, दैनिक पूर्ण विराम, प्रदेश टुडे, प्रवक्ता खबर, वीर अर्जुन, न्यूज प्रिंट, कुमायूं टाइम्स भी पीडीएफ फॉर्मेट में कुमाऊं मंडल से संबंधित समाचार उपलब्ध कराते हैं।  

यूट्यूब पर भी कई कुमाउनी कमा रहे नाम व पैंसा: यूट्यूब पर कुमाऊं से संबंधित सामग्री वाले चैनलों की बात करें तो 9 जुलाई 2009 से चल रहा करीब एक लाख व्यूज वाला नवीन समाचार (पहाड़ की कुशल बात) चैनल उत्तराखंड के सबसे पुराने चैनलों में शामिल है। वहीं इधर कई नए चैनल और उनके संचालक यूट्यूब से काफी कम समय में भी अच्छा नाम कमा रहे हैं, तथा इस तरह नया मीडिया कुमाउनी गीत-संगीत को आगे बढ़ाने के साथ ही अपनी जड़ो से दूर रहने वाले युवाओ को लोक-भाषा व लोक संगीत से जोड़ने में अपनी भूमिका निभा रहा है। 9 जून 2013 को शुरू हुए अनमोल प्रोडक्शन चैनल के भी करीब 50 लाख व्यूज हो चुके हैं। इसके अलावा 5 सितंबर 2013 को शुरू हुए इजा प्रोडक्शन व इजा स्टूडियो के लोकरंग टीवी नाम के यूट्यूब चैनल के करीब 3.3 लाख सबस्क्राइबर हैं। इसी तरह गोपू बिष्ट ठेट पहाड़ी का 21 जनवरी 2014 को शुरू हुआ चैनल भी 18 हजार से अधिक सबस्क्राइबर्स युक्त है। इधर हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में दिवंगत हुए कुमाउनी लोक गायक पप्पू कार्की के 8 जुलाई 2015 को शुरू हुए चैनल ‘पीके इंटरटेनमेंट ग्रुप’ पर प्रस्तुत ताजा जागर की तर्ज पर गाये गये गीत ‘मधुली’ को तीन दिन में 55 हजार हिट मिले हैं।  इस चैनल के 30 हजार से अधिक सबस्क्राइबर हैं। वहीं कुमाऊं के पिथौरागढ़ के ग्राम स्याल्बे (निकट मुवानी) तहसील डीडीहाट के मूल निवासी व दिल्ली में कार्यरत 29 वर्षीय युवा अनिल सिंह पानू की रचनात्मकता का जादू भी यू-ट्यूब पर सिर चढ़कर बोल रहा है। 6 जून 2016 को शुरू हुए अनिल के ताजा फनी वीडियो चैनल जेएमएस आर्ट्स यानी ‘जय मलयनाथ स्वामी’ के 3.34 लाख सबस्क्राइबर हो गये है, और इसे यू-ट्यूब की ट्रेडिंग में 58 लाख दर्शकों के साथ एक वर्ष के भीतर पूरे देश में चौथी बार नंबर वन रैंक मिली है। इससे उन्हें अपने यू-ट्यूब चैनल से मासिक डेढ़ लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। चैनल बनाने के दूसरे माह ही उन्हें 17400 रुपये की पहली आय हुई। साथ ही तीन माह पहले वे एक लाख सब्सक्राइबरों के साथ सिल्वर बटन भी प्राप्त कर चुके हैं। इसी तरह 29 नवंबर 2016 को शुरू बखाई टीवी यूट्यूब चैनल के 25 हजार व 8 अक्टूबर 2017 को शुरू हुए इजा प्रोडक्शन के क्याप टीपी के केवल दो वीडियो से ही सवा पांच लाख के करीब व्यूज हैं। वहीं 8 दिसंबर 2016 को शुरू हुए रंगीलो कुमाऊं चैनल के भी 8.56 हजार से अधिक व्यूज हैं। इसके अलावा 24 जनवरी 2017 से शुरू  कुमाउनी गीतों के चैनल ‘लकी इंटरटेनमेंट’ के 4.7 हजार, हल्द्वानी के युवा कॉलेज छात्र करन लोहनी व त्विशा भट्ट के 16 अप्रैल 2017 को शुरू ‘पहाड़ी घचेक’ के नाम से लोकप्रिय उत्तराखंडी-कुमाउनी वेब सिरीज के भी 5000 से अधिक सबस्क्राइबर हो चुके हैं। 24 अप्रैल 2017 से शुरू कॉमेडी चैनल ‘कुमाउनी कल्चर एंड कॉमेडी बाई अमित भट्ट’ के 15 हजार सब्स्क्राइबर, 26 अप्रैल 2017 से सुप्रसिद्ध कुमाउनी लोक गायक गोपाल बाबू गोस्वामी के पुत्र रमेश बाबू गोस्वामी द्वारा शुरू कुमाउनी गीतों के चैनल ‘गोपाल बाबू गोश्वामी आरबीजी’ के 6.3 हजार सबस्क्राइबर और 30 अप्रैल 2017 से शुरू ज्योति सुभाष चंद के कॉमेडी चौनल ‘हरी खुरसाणी एंटरटेनमेंट’ के 5 लाख व्यूज हैं, और ये प्रतिमाह यूट्यूब से भी हजारों-लाखों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं।

फेसबुक पेज: 

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इनके अलावा कई प्रवासी संगठनों के भी निम्न फेसबुक पेज हैं: कुमाऊं संघ कानपुर, सांस्कृतिक समिति गाजियाबाद, कुमाऊं भ्रातृ मंडल फरीदाबाद, कुमाऊं सभा रजिस्टर्ड कालका, कुमाऊं मित्र मंडल पुणे व कुमाऊं समाज भोपाल आदि।

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